गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

१. २. ३.

१.

सूरज पूरब से उगा
इसलिए परछाई पश्चिम में दिखी
ये विज्ञान की नही
इतिहास की सीख है.

बेहद नाकारा हैं हम
अगर इतिहास खुद को दोहराता है
बेहद नाकारा है इश्वर
अगर विज्ञान का सच अंतिम है

मुझे प्रतियोगिता से चिढ़ है
और इसीलिए नाकारे इश्वर से भी.

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२.

तुम्हारा अगला पैर
पिछले पैर को पीछे छोड़ के रहेगा एक दिन

ये बात तुमने किताब में पढ़ी
और सच मान ली

सदियों बाद कहा गया
कुसूर तुम्हारा नही
पैरो का है

ये नयी किताबो में लिखा था

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३.

क्या सूरज पूरब से उगता है ?
बुद्ध मौन रहे.

क्या किताबे मिथ्या है ?
बुद्ध मौन रहे.

बुद्ध कुछ बोले क्यों नही ?
इतिहास ने ग्रन्थ टटोल डाले.
बुद्ध हँसे क्यों नही ?
इतिहास ने ये प्रश्न अनसुना कर दिया.
यही इतिहास की सीमा है
और कविता की संभावना.

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 13 नवम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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