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गुरुवार, 11 अप्रैल 2013

अनिद्रा उवाच

जानते हो अगर दिन अधूरा रह जाए तो नींद नहीं आती. या आती भी है तो इतनी सतही कि उठकर ऐसा लगे मानो एक छोटे अंतराल का बुरा सा स्वप्न देखा हो----
( क्या दिन अधूरा रह जाने पर ही ऐसा होता है ?/ और ये भी तो बताओ  की दिन पूरा हो जाने का पैमाना क्या होता है? )
 ----- क्योकि दिन की ताकते-जो सदा से जीवन की ताकतों के साथ रही हैं- रात के अँधेरे का अतिक्रमण कर जाती है..
.. रात की शान्ति, उसके भोलेपन और सबको अपना लेने की कोशिश या आदत ने उसे कई तत्वों के संघर्ष का मैदान बना दिया है.
जहा चाँद, तारे, और नक्षत्र दिन के हस्तक्षेप का प्रतिनिधित्व करते है और सूरज की उजली छवि के बल पर चमकते रहते है, वही शहर का अवसाद, चुप्पी और सन्नाटा भी रात की नैसर्गिक शान्ति और एकांत की आड़ में  वातावरण पर काबिज हो जाते है.

शहरों में नींद और रात को खोजना मुश्किल और उनका मेल कराना और भी दुष्कर होता जा रहा है.

सोने की सजग कोशिशे बदस्तूर जारी है.

शहर फ़ैल रहा है. सजग रहना.
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आज रात नींद नहीं आएगी वो जानता था. गहरी नींद सोये हुए ज़माना सा बीता लगता है. एक शोर है जो सोने नहीं देता या शायद स्वयं के निर्मित एकाकीपन से उपजा इतना सन्नाटा और सुनसान आसपास पसर गया है कि उसे सोने की जगह नहीं मिलती.

(किसी रोज़, आकर सब जगह पर लगा दो. सोने की थोड़ी सी जगह बना दो.)

"जगह खाली है, एक ईश्वर चाहिए !"







शनिवार, 16 मार्च 2013

कुछ .. डायरी से ..


नदियाँ  समंदर की तिश्नगी को तृप्त करने की कोशिश करती हैं या धरती के उस हिस्से की प्यास को जिसे समंदर भी नहीं बुझा पाया ?
कोई नहीं जानता.
नदी प्रश्न और उत्तर की ज़बान नही बोलती. वो केवल आमंत्रण की भाषा जानती है.
पानी का आमंत्रण अमर होता है. आमंत्रित के स्वीकार/अस्वीकार से स्वतंत्र. स्वायत्त, शाश्वत और अमर.
प्रेम पानी सा होता है. समुन्द्र के पानी सा. पानी जिसमे उतर आता है नीला आसमान. और जिसमे समाता सा लगता है क्षितिज.
वैसे हमारा क्षितिज किसी और का आसमान होता है.
क्षितिज सौंदर्य की सबसे मुखर उपस्तिथियो और सटीक अभिव्यक्तियों  में से एक है (- कविता, चाँद,  मुस्कान और मटर के दाने के जैसे ).
सौंदर्य अनैतिक होने के लिए अभिशप्त है.
नैतिक समाज में सौंदर्य अप्राप्त्य रहेगा.
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मैंने कभी कुछ नहीं रचा. या जो रचा वो इतना मूल्यहीन है की उसे डिसओन करना चाहता हूँ. हाँ - थोडा कुछ है जो समेटा है या समेटने की कोशिश की है. वही मूल्यवान है. यह कुछ ख़ुशी भी देता है और इक टीस भी - टीस - कि कितना कुछ था जो समेट न सका... सहेज ना पाया - खो दिया. शायद हमेशा के लिए.

इस टीस और इतिहास से मेरे प्रेम में कुछ गहरा सम्बन्ध है.