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गुरुवार, 11 अक्टूबर 2018

सवाल - जवाब



जब जवाब पहचान हो
और सवाल सुनना नागरिकता

तब पहचानना कि किसके सवाल
यज्ञ के अश्व है 
जो रौंद देना चाहते है दसो दिशाएं

तुम समझना कि अंधी-सत्ता की महत्वाकांक्षा
दुनिया को समझना नही
दुनिया को सुलझाना है

जैसे जीवन को सुलझा देती है विस्मृति
मिथकों को इतिहास
प्रेम को सम्बन्ध
और कविता को तुम.

मुझे विश्वास है समझने में

जैसे बाढ़ को समझती है नदी
ज्वार को समंदर
स्मृति को मिथक
और कवि को कविता 

सुलझा कर
तान दी जाती है प्रत्यंचाएं
समेट ली जाती है पतंगें
और खारिज कर दी जाती है सारी पहेलियाँ 

केवल इसीलिए
मेरे मन की दिशा वर्जित है 
तुम्हारे प्रश्नों के लिए 
तुम्हारे अश्वो के लिए 
तुम्हारे इश्वर के लिए.

बुधवार, 23 दिसंबर 2015

विस्मृति एक आदिम जिद है.










सड़क शहरों को जोड़ती नही
शहर को शहर बनाती है.
वो निर्धारित करती है 
हमारे चलने का ढंग,
हमारी गति,
और हमारा गंतव्य भी.
गलियों में चलने वाला मनुष्य ज्यादा स्वायत्त होता है. 

पहाड़ो, नदियों और अब तो 
समंदर तक भी पहुँच गयी है सड़क.
मेरा गाँव भी 
बस शहर से दूर है
सड़क से नही
जिसको पोषित करती है अनगिन गलियाँ .
मै दस बरस बाद भी गलियों से होता हुआ पहुँच सकता हूँ अपने गाँव वाले घर.

मुझे नही याद रहते सड़को के नाम, 
घरो के पते,
और रास्ते भी. 
पिता इसे स्मृति-दोष कहते है 
और तुम मेरी लापरवाही.    
मुझे गहरे मे ये विस्मृति कोई आदिम जिद-सी लगती है.

हांलाकि मै गलत भी हो सकता हूँ.
असल में,
जिस तरह आप एक ही नदी में दो बार नही उतर सकते,
आप एक ही सड़क पर दो बार नही चल सकते.
और मुझे याद नही उस रोज़ सड़क पर चलते हुए
मैंने इस विषय में क्या सोचा था.