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सोमवार, 18 मार्च 2019

मिरर इमेज

कमरे के एक हिस्से से झांकता दूसरा हिस्सा 













मेरे नए कमरे में दो शीशे हैं -
एक पहले से दीवार पे जड़ा था
दूसरा मेरे साथ आई अलमारी पर आया

दोनों में मेरा अक्स
मुझे अलग-अलग सा दिखता है.

ये रोशनी का फेर भी हो सकता है या मेरी उनसे दूरी का अंतर
या फिर क्या पता बदल जाते हों देखने के कोण

वैसे, मुझे ये लगता है ये दोनों शीशो की उम्र का अंतर है.

तुम नहीं समझोगे
कि कैसा लगता है मुझे ये जानकर
कि ज़रा सी जगह, कोण या उम्र बदलने पर
बदल सकता है मेरा 'मै' होना.

मेरा इंजिनियर दोस्त बस दो मिनट में समझाकर भौतिकी और प्रकाश के नियम
धो देता है सारी 'नाटकीयता'
नियमो के आलोक में  जीवन की व्याख्या
मिनट-दो मिनट ही तो लेती है.

बस, ये सब बताते हुए
उसकी आँखों में वो नमी नहीं दिखती
जो कम से कम मेरे एक अक्स में
अब भी बिलकुल साफ़ दिखाई पड़ती है.

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2018

सवाल - जवाब



जब जवाब पहचान हो
और सवाल सुनना नागरिकता

तब पहचानना कि किसके सवाल
यज्ञ के अश्व है 
जो रौंद देना चाहते है दसो दिशाएं

तुम समझना कि अंधी-सत्ता की महत्वाकांक्षा
दुनिया को समझना नही
दुनिया को सुलझाना है

जैसे जीवन को सुलझा देती है विस्मृति
मिथकों को इतिहास
प्रेम को सम्बन्ध
और कविता को तुम.

मुझे विश्वास है समझने में

जैसे बाढ़ को समझती है नदी
ज्वार को समंदर
स्मृति को मिथक
और कवि को कविता 

सुलझा कर
तान दी जाती है प्रत्यंचाएं
समेट ली जाती है पतंगें
और खारिज कर दी जाती है सारी पहेलियाँ 

केवल इसीलिए
मेरे मन की दिशा वर्जित है 
तुम्हारे प्रश्नों के लिए 
तुम्हारे अश्वो के लिए 
तुम्हारे इश्वर के लिए.

सोमवार, 17 दिसंबर 2012

     उसके प्रश्न में प्रश्नवाचक चिन्ह नहीं थे
     न उसके रोने मे आवाज़
इसलिए (?)
उसका प्रश्न और रुदन असहनीय था |

                                                                 


उसकी अभिव्यक्ति मूक थी
और भाषा निःशब्द
इसलिए (?)
वह खुद के लिए भी एक अजनबी था

     उसके विचार प्रगतिशील थे
     और प्रगतिशीलता तटस्थ
इसलिए (?)
उसका जीवन एक सुन्दर विचार था !

     मानवता उनका धर्म था
     और सारे धर्म अमानवीय
इसीलिए (?)
उनका समाज नास्तिक था |

     वो इश्वर को खोजना चाहते थे
     उस चाह को कभी नहीं खोज पाए
इसलिए (?)
उनका समाज पराजित था |

     उन्हें बहादुर दिखने की चाह थी
     उन्होंने कभी लड़ाई नहीं लड़ी
इसलिए (?)
वो लज्जित थे |

उन्हें लज्जा से डर लगता था
और अपने चेहरे से भी
......
उन्होंने मुखौटे लगा लिए |